शुक्रवार, 24 जून 2016

अरुण जेटली ने दी नसीहत, सुब्रह्मण्यम स्वामी ने दी खूनखराबे की धमकी

नई दिल्ली। सुब्रह्मण्यम स्वामी ने वित्त मंत्री अरुण जेटली के खिलाफ अपना हमला और तेज कर दिया है। भाजपा के राज्यसभा सांसद स्वामी ने शुक्रवार को अपने ऊपर नियंत्रण रखने की सलाह देनेवालों को धमकी भरे अंदाज में कहा कि अगर वह अपने पर उतर आए तो खूनखराबा हो जाएगा।
स्वामी ने शुक्रवार को साफ तौर पर वित्त मंत्री जेटली पर निशाना साधते हुए अपने ट्वीट में कहा, ‘मुझे बिना मांगे अनुशासन में रहने की सलाह देने वालों को यह अंदाजा नहीं है कि अगर मैंने अनुशासन तोड़ दिया तो खूनखराबा हो जाएगा।’ हालांकि स्वामी ने जेटली का नाम तो नहीं लिया लेकिन वह स्पष्ट रूप से वित्तमंत्री का हवाला दे रहे थे, जिन्होंने बुधवार को उनसे मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन पर हमले के मद्देनजर नियंत्रण और अनुशासन की अपील की थी। 
स्वामी द्वारा कल आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास पर निशाना साधने के मद्देनजर सचिव के बचाव में भी जेटली ने अनुशासन शब्द का इस्तेमाल किया था। स्वामी ने एक अन्य ट्वीट में जेटली पर इशारों में हमला करते हुए भाजपा से यह भी कह डाला कि वह मंत्रियों निर्देश दें कि विदेशी दौरों में वे पारंपरिक और आधुनिक भारतीय परिधान ही पहनें। कोट और टाई में वे वेटर जैसे लगते हैं। शुक्रवार को ही अखबारों में अरुण जेटली और बैंक ऑफ चाइना के चेयरमैन का एक फोटो आया है जिसमें वित्त मंत्री ने लाउंज सूट पहना हुआ है।
आर्थिक क्षेत्र से जुड़े लोगों पर लगातार हमले कर रहे सुब्रमण्यन स्वामी ने हाल ही में आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास को अपना निशाना बनाया था। उनके इस हमले के बाद अरुण जेटली ने ट्वीट किया था कि वित्त मंत्रालय के एक अनुशासित अधिकारी के खिलाफ अनुचित और झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। जेटली के इस ट्वीट के बाद स्वामी ने अपना ट्वीट हटा दिया था।
इससे पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को कहा था कि राजनीतिज्ञों को सोच-समझकर बयान देने चाहिए। उनके बयान पर पलटवार करते हुए स्वामी ने भी कहा था, ‘जेटली क्या बोले, क्या नहीं बोले इससे मुझे क्या लेना-देना?’ स्वामी ने कहा कि अभी जरूरत नहीं है। जब जरूरत पड़ेगी तब वह पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से बात करेंगे। स्वामी पहले ही रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन और मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं।

कैमरन बोले, BRIEXIT नतीजों का करूंगा सम्मान, शरद से पूर्व दूंगा इस्तीफा

लंदन। ब्रिटेन के यूरोपीय संघ (ईयू) में बने रहने या इससे बाहर निकलने को लेकर कराए गए जनमत संग्रह के नतीजे आने के बाद प्रधानमंत्री डेविट कैमरन ने अपना इस्ताफा देने की घोषणा कर दी है। उन्होंने कहा कि वह शरद ऋतु से पहले इस्तीफा दे देंगे। पीएम ने कहा कि उन्होंने पद पर रहते हुए जो किया है, उस पर उन्हें गर्व है। हालांकि उन्होंने कहा कि यह जनमत संग्रह उनके लिए नहीं था, लेकिन इसका डटकर सामना किया। कैमरन ने कहा कि ब्रिटिश जनता ने दूसरा पथ चुना है और इसके लिए उन्हें नया प्रधानमंत्री चाहिए।
बता दें कि इस मुद्दे पर गुरुवार को हुए मतदान की शुक्रवार को गिनती हुई, जिसमें 52 फीसदी जनता ने ‘ब्रेक्सिट’ के पक्ष में फैसला दिया है। ‘रिमेन’ (ईयू सदस्य बने रहने) अभियान के पक्ष में 15,692,092 वोट पड़े, जबकि ‘लीव’ (ईयू से बाहर आने) के पक्ष में इससे 6,835,512 अधिक वोट पड़े।
कैनरन ने कहा, मैं आने वाले हफ्तों और महीनों में सब कुछ करूंगा, लेकिन सोचता हूं कि अगले गंतव्य के लिए मुझे कैप्टन नहीं रहना चाहिए। यह फैसला कोई हल्के में नहीं लिया गया है। मैं मानता हूं कि यह समय नए नेतृत्व के लिए ठीक है। यहां कोई सटीक समय देने की जरूरत नहीं है, लेकिन नए प्रधानमंत्री का चुनाव अक्टूबर महीने में कंजरवेटिव पार्टी की कॉन्फ्रेंस में हो जाएगा।
कैमरन ने कहा कि वह दुनियाभर के लोगों को यह आश्वासन देना चाहते हैं कि ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था मूलत: मजबूत है। जहां तक यूके में बसे यूरोपियन यूनियन के नागरिकों का सवाल है तो प्रधानमंत्री ने उन्हें साफ किया है कि उनकी स्थिति में फौरी तौर पर किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा। कैमरन ने कहा कि वह इस जहाज को स्थिर बनाए रखने की कोशिश करेंगे लेकिन अक्टूबर में इस देश को नया प्रधानमंत्री मिल जाएगा। उन्होंने कहा कि वह वह ‘कप्तान’ नहीं होंगे जो देश को लहरों से पार लगाएंगे।

ब्रेग्जिट पर नतीजे आने के बाद ही माना जा रहा था कि ब्रिटेन की जनता ने यूरोपियन यूनियन पर हुए जनमत संग्रह में जो फैसला दिया है, उससे प्रधानमंत्री डेविट कैमरन का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। नतीजे से खुश ईयू से अलग होने के पक्ष में पिछले बीस वर्षों से आंदोलन चला रहे यूकेआईपी नेता नाइजल फेराज ने कहा था कि कैमरन को तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए। दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी लेबर पार्टी ने भी कहा था कि कैमरन को अपने पद को लेकर विचार करना चाहिए।
यदि ब्रिटेन के लोग यूरोपीय संघ में रहने के पक्ष में मतदान करते तो यह कैमरन के लिए बड़ी जीत होती। कैमरन ताकतवर नेता के तौर पर उभरते। हालांकि दूसरी तरफ उनकी पार्टी में पद छोडऩे की आशंकाओं को देखते हुए 80 से ज्यादा कंजरवेटिव सांसदों ने हस्ताक्षर कर कैमरन के पास पत्र भेजा था, जिसमें उन्होंने आग्रह किया था कि नतीजे चाहे जो भी आएं, वह पीएम की कुर्सी पर बने रहें। लेकिन ईयू से हटने के फैसले से सबसे ज्यादा झटका ब्रिटेन की करंसी पाउंड को लगा है। पाउंड 1985 के बाद सबसे निचले स्तर पर आ गया। ऐसे में कैमरन पर भारी दबाव था।

फेराज नतीजे आने के बाद सबसे पहले कहा कि उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। हालांकि लेबर पार्टी के शैडो फॉरन सेक्रेटरी हिलेरी बेन ने कहा था कि उन्हें पता नहीं कि कैमरन पीएम पद पर कब तक बने रहेंगे। उन्होंने कहा, आप प्रधानमंत्री हैं। आपने ही जनमत संग्रह कराया और आपकी प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी। आपने ईयू में रहने के पक्ष में तर्क दिया था, ऐसे में आपके लिए पद पर रहना आसान नहीं है।
प्रधानमंत्री ऑफिस के पूर्व सहयोगी एंडी कोल्सन ने कहा था कि उन्हें कैमरन के इस्तीफे पर संदेह है। उन्होंने कहा, बड़ी संख्या में लोग उनसे पद पर बने रहने की अपील कर रहे हैं। मसला यह है कि हमारे नेतृत्व को क्या करना चाहिए। यह समय नौसिखिए का नहीं है, लेकिन मुझे इस पर संदेह है कि कैमरन इस्तीफा पर विचार कर रहे हैं। यूकेआईपी सांसद डगलस कार्सवेल ने अपने पार्टी नेताओं की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि कैमरन से इस्तीफे की मांग नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा था कि अच्चा होगा कि हम नाइजल को कुछ हफ्तों या महीनों तक नहीं सुनें। उन्होंने कहा था, हमारे लिए मुश्किल वक्त है। हमें थोड़ी गंभीरता दिखाते हुए राष्ट्रीय हित के बारे में सोचना चाहिए। डेविट कैमरन प्रधानमंत्री हैं और वह प्रधानमंत्री रहेंगे। ब्रेग्जिट का समर्थन करने वाले कंजरवेटिव सांसद एंड्र्यू ब्रिडेन ने भी कहा था कि यदि कैमरन इस्तीफा देते हैं, तो यह देश के हित में नहीं होगा। उन्होंने कहा था कि इस हालत में हमें प्रधानमंत्री पर भरोसा करना चाहिए।

गुरुवार, 23 जून 2016

कैबिनेट में फेरबदल से पहले PM ने मंत्रियों से मांगी अप्रेजल रिपोर्ट

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रियों से 30 जून को सेल्फ अप्रेजल रिपोर्ट मांगी है। सभी मंत्री अपने कामकाज को लेकर प्रेजेंटेशन देंगे। उनकी अप्रेजल रिपोर्ट से कैबिनेट में फेरबदल को लेकर फैसला हो सकता है। सरकार से जुड़े एक सूत्र का कहना है, मोदी सरकार द्वारा दूसरा बजट पेश किए जाने के बाद से सभी मंत्रियों को अपने विभाग के कामकाज पर एक प्रेजेंटेशन बनाकर देने का निर्देश दिया गया है। मीटिंग ऐसे समय में बुलाई गई है जब मॉनसून सत्र से पहले कैबिनेट में फेर-बदल की खबरें तेज हैं। 

कैबिनेट में होने वाले बदलावों के बारे में मीडिया में ऐसी खबर है कि आने वाले दिनों में जिन राज्यों में चुनाव हैं, वहां के प्रतिनिधियों को कैबिनेट में जगह दी जाएगी। माना जा रहा है कि यूपी और पंजाब के कोटे से ज्यादा मंत्री बनाए जा सकते हैं। दोनों ही राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं। सरकार से जुड़े एक सूत्र का कहना है, ऐसी खबर है कि 30 जून को होने वाली बैठक कैबिनेट में बदलाव से पहले की प्रक्रिया है। 

प्रधानमंत्री खुद समय-समय पर विभिन्न मंत्रालयों का प्रदर्शन देखते रहे हैं और उनका फोकस योजनाओं के तय समय में क्रियान्वयन पर रहा है। कई महत्वपूर्ण राज्यों में होने वाले चुनावों से पहले जमीनी स्तर पर योजनाओं को पूरा करने की कोशिश तेज है। इन दिनों विभिन्न मंत्रालयों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्द्धा का माहौल नजर आ रहा है। सभी मंत्री और विभाग सर्वश्रेष्ठ रेटिंग पाने के लिए पुरजोर कोशिश कर रहे हैं।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी ने मंत्रियों से कहा है कि एनडीए सरकार द्वारा पेश किए गए दूसरे बजट के बाद से उन्होंने जो काम किया है उसका हिसाब-किताब इस मीटिंग में लेकर आएं। माना जा रहा है कि 15 जुलाई के बाद शुरू होने वाले पार्लियामेंट के मानसून सेशन से पहले मोदी कैबिनेट में बदलाव कर सकते हैं। इस लिहाज से 30 जून को होने वाली मीटिंग खास हो जाती है।

राजस्थान के नेता ओम माथुर और अर्जुन मेघवाल मंत्री बनाए जा सकते हैं। तीन और नेता मंत्री बनने की दौड़ में हैं। यूपी में अगले साल इलेक्शन के मद्देनजर मनोज सिन्हा और संजीव बालियान को प्रमोट किया जा सकता है। दोनों अभी राज्यमंत्री हैं। पावर मिनिस्ट्री का इंडिपेंडेंट चार्ज रखने वाले पीयूष गोयल भी प्रमोट हो सकते हैं। इलाहाबाद से सांसद श्याम चरण गुप्ता मंत्री बनाए जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि यूपी में विधानसभा चुनाव को देखते हुए ये फैसला लिया जा सकता है। असम से रमेन डेका को भी मिनिस्टर बन सकते हैं। विनय सहस्त्रबुद्धे मंत्री बनाए जा सकते हैं। वे राज्यसभा से सांसद हैं। वहीं, गिरिराज सिह, नजमा हेपतुल्ला और निहालचंद की कुर्सी जा सकती है। 

सूत्रों का मानना है कि मोदी कैबिनेट में पंजाब और यूपी के नेताओं को ज्यादा जगह मिल सकती है। इसकी वजह इन दो राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव हैं। बता दें कि मोदी समय-समय पर अपने मंत्रियों से परफॉर्मेंस रिपोर्ट मांगते रहे हैं। 

ताशकंद मिशन पर PM, बोले-भारत को लाभप्रद नतीजों की उम्मीद

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार सुबह 11 बजे उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद के लिए रवाना हो गए है। इससे पहले मोदी ने कहा कि भारत शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) का सदस्य बनकर खुश होगा और इसे एससीओ के जरिए विशेष रूप से आर्थिक सहयोग के क्षेत्र में लाभप्रद नतीजों की उम्मीद है। मोदी ने उज्बेकिस्तान में होनेवाली एससीओ की बैठक के लिए रवाना होने से पहले जारी बयान में कहा, मैं एससीओ बैठक में हिस्सा लेने के लिए उज्बेकिस्तान जाऊंगा और वहां एससीओ के सदस्य देशों के नेताओं के साथ वार्ता करूंगा। उन्होंने कहा, भारत एससीओ का सदस्य बनकर खुश होगा और उसे एससीओ के जरिए विशेष रूप से आर्थिक सहयोग क्षेत्र में लाभप्रद नतीजों की उम्मीद है।
बयान के मुताबिक, भारत के मध्य एशिया के साथ संबध अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और वह हमेशा आर्थिक स्तर पर तथा क्षेत्र में लोगों के साथ संबंधों में विस्तार चाहता है। एससीओ बैठक का आयोजन उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में 23-24 जून को होगा।

बुधवार, 22 जून 2016

UP-बिहार में बारिश संग बरसी मौत,बिजली गिरने से 76 जानें गई

पटना। बिहार के विभिन्न जिलों में पिछले 24 घंटे के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से 56 लोगों की मौत हो गई जबकि 15 से अधिक लोग झुलस कर घायल हो गए। आपदा प्रबंधन विभाग ने मृतक के परिजनों को चार-चार लाख रूपये की सहायता देने की घोषणा की है। 

एएनआई की खबर के अनुसार यूपी व बिहार में बिजली गिरने से कुल 76 मौतें हुई हैं।

राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री चंद्रशेखर ने बुधवार को पटना में संवाददाताओं को बताया,पिछले 24 घंटे के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों में आकाशीय बिजली गिरने से 55-56 लोगों की मौत हो चुकी है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से अब भी वज्रपात के शिकार होने वाले लोगों की सूचना मिल रही है, इसलिए मृतकों की संख्या बढ सकती है। उन्होंने बताया कि सरकार ने मृतकों के आश्रितों को चार-चार लाख रूपये की आर्थिक सहायता देने का फैसला किया है। 

पुलिस के अनुसार, ये मौतें राज्य के 15 अलग-अलग जिलों में हुई हैं। सबसे ज्यादा मौतें पटना में हुई हैं जहां बिजली गिरने से आठ लोगों की मौत हुई। रोहतास जिले में बिजली गिरने से पांच लोगों की मौत हुई जबकि नालंदा और औरंगाबाद जिले में चार-चार लोग आसमानी कहर का शिकार हुए हैं। इसके अलावे मुंगेर में दो, सहरसा व कटिहार में तीन-तीन और किशनगंज, पश्चिम चंपारण व गया जिले में एक-एक व्यक्ति की मौत हो गई है। मौतों की संख्या की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन भोजपुर, बक्सर, औरंगाबाद और कैमूर जिले में भी आकशीय बिजली की चपेट में आने से लोगों की अकाल मौत होने की सूचना है।

राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव ब्यास जी ने बताया कि आकाशीय बिजली की चपेट में आने से विभिन्न क्षेत्रों में 15 से अधिक लोग घायल भी हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। उन्होंने बताया कि संबंद्ध जिला प्रशासन द्वारा मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रूपये की आर्थिक सहायता देने की कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। कई क्षेत्रों में आंधी-बारिश से मकानों को भी नुकसान पहुंचा है

उल्लेखनीय है कि राज्य के अधिकांश हिस्सों में बुधवार को भी वर्षा हो रही है। बीते 24 घंटों के दौरान पटना में 21 मिलीमीटर, भागलपुर में 88 मिलीमीटर तथा पूर्णिया में 97 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। पटना स्थित मौसम विज्ञान केन्द्र के निदेशक एके सेन ने बताया कि मानसून के सçRय होने के कारण अगले 24 घंटे के दौरान उत्तर बिहार में लगातार भारी बारिश होगी। (आईएएनएस) 

सोमवार, 20 जून 2016

महेश गिरि के समर्थन में अनशन पर स्वामी, केजरी के मंत्रियों को बताया चोर

नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर के बाहर धरने पर बैठे भाजपा सांसद महेश गिरि का समर्थन करने भाजपा के प्रमुख नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी भी पहुंच गए है। भाजपा सांसद महेश गिरि रविवार रात से ही केजरीवाल के घर के बाहर आमरण अनशन में बैठे हैं। सुब्रह्मण्यम स्वामी ने केजरीवाल पर अपने अंदाज में हमला करते हुए उनके सभी मंत्रियों को चार कह डाला। बढ़ते सियासी घमासान और मौके की नजाकत को देखते हुए अनशन की जगह पर बड़ी संख्या में सीआरपीएफ को तैनात कर दिया गया है।
अनशन करने पहुंचे स्वामी ने कहा, मैं यहां महेश गिरि जी का समर्थन करने पहुंचा हूं। केजरीवाल ने उनके ऊपर जो आरोप लगाए हैं, वह बेबुनियाद हैं। अरविंद केजरीवाल को माफी मांगनी चाहिए। सुब्रह्मण्यम स्वामी ने आप सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि केजरीवाल के मंत्री चोर हैं। ये देशद्रोहियों की सरकार है, महाभ्रष्ट सरकार है। दिल्ली सरकार को तुरंत बर्खास्त कर देना चाहिए। स्वामी ने कहा कि जो राज्य सरकार संविधान का पालन नहीं करती है, उसे तुरंत बर्खास्त करना चाहिए। महेश गिरि के मामले में स्वामी ने केजरीवाल से माफी मांगने की भी मांग की है।

सुब्रह्मण्यम स्वामी ने इसके साथ ही दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा, ‘एलजी को बर्खास्त कर देना चाहिए। यह भी रोज अहमद पटेल की सलाह पर काम करते हैं। संविधान के खिलाफ काम कर रहे हैं।’ स्वामी ने आगे कहा कि दिल्ली की सरकार को भी बर्खास्त कर देना चाहिए. उन्होंने कहा कि राज्य की बदहाली के बारे में गृहमंत्री राजनाथ सिंह से बात करेंगे।
बता दें कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर के बाहर भाजपा सांसद महेश गिरि का धरना पिछले 24 घंटों से जारी है। वह रातभर से अनशन पर बैठे हैं। महेश गिरि ने कहा है कि जब तक केजरीवाल उनसे बहस करने के लिए नहीं आते, वह धरने पर बैठे रहेंगे।
केजरीवाल ने दोहराए आरोप
गिरि की खुली बहस की चुनौती का कोई जवाब देने के बजाय अरविंद केजरीवाल ने उन पर दोबारा आरोप लगाया और जांच की मांग की। दिल्ली के सीएम और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक केजरीवाल ने गिरि पर हत्या का आरोप लगाया था।
इस बीच महेश गिरि ने दिल्ली के पुलिस कमिश्नर आलोक कुमार वर्मा को चिट्ठी लिखी है, जिसमें उन्होंने उन पर लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही लिखा है कि अगर वह दोषी हैं तो उन्हें गिरफ्तार किया जाए।
आशुतोष बोले- गिरफ्तारी दें गिरि
इस बीच, आम आदमी पार्टी के नेता आशुतोष ने ट्वीट कर महेश गिरि पर हमला बोला। उन्होंने ट्वीट में लिखा कि हत्या के आरोपी को धरना पर नहीं बैठना चाहिए, बल्कि गिरफ्तारी देकर जांच में मदद करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गिरि 29 दिन तक अनशन करें। 

शनिवार, 18 जून 2016

इफ्तार पार्टी! सलमान खान-लूलिया और



दबंग सलमान खान जो भी करते हैं वह ट्रेंड बन ही जाता है चाहे उनकी हेयर-स्टाइल हो या फिर बोलने का अंदाज! कुछ ऐसा ही सलमान इस बार इफ्तार पार्टी में करने वाले हैं। जैसा की सभी जानते हैं मुंबई में हर साल एमएलए बाबा सिद्द्की इफ्तार पार्टी का आयोजन करते हैं। लेकिन इस बार यह इफ्तार पार्टी होगी थोड़ी खास...




सलमान-बाबा का याराना लीडिंग अखबार मुंबई मिरर के मुताबिक इस इफ्तार पार्टी में इस बार सलमान-लुलिया साथ में शिरकत कर सकते हैं। बाबा सिद्द्की और सलमान का याराना काफी पुराना हैं। इसी इफ्तार पार्टी में बाबा सलमान-शाहरुख को एक दूसरे के करीब लाए थे। बता दें इस बार बाबा की पार्टी में पुरुष और महिलाएं दोनों शिरकत करेंगें।




बाबा सिद्द्की बाबा सिद्द्की ने खुद इस बात को स्वीकारते हुए कहा कि सलमान, अलवीरा ने उन्हें सज्जेस्ट करते हुए कहा कि इस बार इफ्तार पार्टी में महिलायों को भी आमंत्रित किया जाए। जिसके चलते मेने सभी गेस्ट और पॉलिटिशियन को अपनी बीवियों के साथ आने का निमंत्रण दिया हैं।




सलमान खान-लुलिया इस पार्टी में सलमान के साथ लुलिया और उनकी बहन अलवीरा शिरकत करेगीं। बता दें यह इफ्तार पार्टी रविवार को होंगी आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में पहली बार ऐसा होगा की महिलाएं-पुरष एक साथ इफ्तार पार्टी में रोजा खोलेंगे।




दूसरी ऑफिशियल पब्लिक अपीयरेंस
हम्म्म वाकई सलमान का यह आईडया काफी अच्छा है। साथ ही यह सलमान खान और लुलिया की यह दूसरी ऑफिशियल पब्लिक अपीयरेंस होगी। वैसे हाल ही में सलमान अपनी खास दोस्त प्रिटी जिंटा के रिस्पेशन में लुलिया के साथ नजर आए थे।







जिसके बाद कयास लगाए जा रहे थे कि सलमान और लुलिया अब अपने रिश्ते को सभी के सामने ऑफिसियल कर देंगें लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं।